थाईलैंड “जाको राखे साइयां, मार सके न कोय” हैट्सऑफ उनके सब के हौसले पर

रिपोर्ट फराह अंसारी
23 जून को थाइलैंड की अंडर-16 फुटबॉलट टीम के 12 लड़के अपने कोच के साथ गुफा में घुसे तो उन्हें नहीं पता था कि पूरी दुनिया उन्हें बचाने में जुट जाएगी। जब 10 जुलाई को अभियान पूरा हुआ और सभी को सही सलामत बाहर निकाल लिया गया। सभी उनके सुरक्षित बाहर निकलने की दुआ कर रहे थे। थाइलैंड ही नहीं पूरी दुनिया के चेहरे पर राहत के साथ ही खुशी भरी मुस्कान थी। सख्त मेहनत और प्लानिंग के बाद इस इम्पॉसिबल लग रहे मिशन को पॉसिबल बनाया गया।

11 से 16 साल के 12 लड़के अपने कोच के साथ फुटबॉल प्रैक्टिस के बाद उत्तरी थाइलैंड की थाम लुआंग गुफा पहुंचे। भारी बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति आ गई जिसकी वजह से सबको गुफा के अंदर जाना पड़ा और पानी से बचने के लिए ये सब गुफा के 4 किलोमीटर अंदर पहुंच गए। 2 जुलाई को साउथ ऐंड मिड वेल्स केव रेस्क्यू टीम के सदस्य और ब्रिटिश गोताखोर रिचर्ड स्टैनन और जॉन वोलैनथन ने गुफा में बच्चों को तलाशा। ये सभी बच्चे भूखे रहने की वजह से बेहद कमजोर व दुर्बल दिख रहे थे और गोताखोरों को देखते ही सबके चेहरों पर मुस्कान आ गई।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सभी बच्चों की सेहत ठीक है। उन्हें बुखार नहीं है लेकिन फिलहाल 7 दिनों तक हॉस्पिटल में डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे। रविवार को निकाले गए पहले 4 बच्चों के शरीर का टेम्परेचर काफी कम था और दो बच्चों के फेफड़ों में इन्फेक्शन की आशंका है। दोबारा में निकाले गए बच्चों में से एक की हार्टबीट कम है लेकिन इलाज से उसकी स्थिति में सुधार आ रहा है। फिलहाल डॉक्टर गुफा में होने वाली अन्य बीमारियों की जांच कर रहे हैं।

गुफा में 90 अनुभवी गोताखोर मौजूद थे। इनमें से 40 थाइलैंड के और बाकी अन्य देशों के थे। हर बच्चे ने पानी में घुसने से पहले डाइव मास्क पहना था। बच्चों को निकालने के लिए ऑक्सिजन टैंक साथ ले जाया गया था और एक रस्सी के जरिए रास्ता पता लगता रहा। हर बच्चे के साथ दो गोताखोर थे। गुफा के सबसे संकरे रास्ते को पार करना सबसे मुश्किल काम था जहां बच्चों को बिना गोताखोर के निकलना था। ये गोताखोर बच्चो को बचा कर इनके रियल लाइफ के सुपर हीरो बन गए है।

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