फीस की फांस से कब मिलेगी आजादी

फीस की फांस से कब मिलेगी आजादी
फीस की फांस से कब मिलेगी आजादी

माजिद कुरैशी
प्रदेश में योगी सरकार को एक साल पूरा हो गया है। सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। सरकार के सामने निजी स्कूलों के मनमानी फीस वसूलने की भी समस्या थी। सत्ता पर काबिज होने के बाद सीएम ने इस समस्या का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बावजूद इसके हालात में अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। नया सेशन भी आ गया, फीस रेगुलेटरी बिल का अब तक अता-पता नहीं है, फीस बढ़ोतरी के खिलाफ पैरंट्स फिर से आंदोलन करने की तैयारी कर रहे, पैरंट्स इस मामले को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। नया सेशन शुरू होने को है और अब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, ऐसे में अभिभावकों का रोष बढ़ रहा है।




आखिर अब कब लागू होगा फीस रेगुलेटरी बिल

प्रदेश में फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलनरत अभिभावकों की उम्मीदें नवंबर 2017 में तब बढ़ गई थीं, जब फीस फीस रेगुलेटरी बिल बनाने के लिए उनसे सुझाव मांगे गए थे। पैरंट्स ने सुझाव भी दे दिए थे, मगर अभी तक यह बिल बन ही नहीं पाया है। अभिभावकों का कहना है कि 2018-19 का सत्र भी शुरू होने जा रहा है और बिल अभी तक नहीं बना है। ऐसे में यह बिल कब तक लागू होगा, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है।




क्या 20 से 25 हजार रह जाएगी फीस

अभिभावकों का कहना है कि फीस रेगुलेटरी बिल का पहले जो ड्रॉफ्ट बनाया गया था, उसका पैरंट्स ने विरोध किया था। मिली जानकारी के अनुसार गाजियाबाद पैरंट्स असोसिएशन के एक्जिक्यूटिव मेंबर विवेक त्यागी ने बताया कि उस ड्राफ्ट में स्कूलों को मनमानी करने की छूट दे दी गई थी। विरोध होने पर दोबारा सुझाव मांगे गए थे। डिप्टी सीएम व प्रमुख सचिव के साथ हुई बैठक में पैरंट्स के सुझाव स्वीकार कर लिए गए थे। उसके बाद नया ड्रॉफ्ट तैयार किया गया था। इस नए ड्रॉफ्ट के अनुसार कक्षा 10 तक की पूरे वर्ष की फीस 20 हजार रुपये और कक्षा 12 तक की फीस 25 हजार रुपये रह गई थी। नए ड्राफ्ट के अनुसार, बच्चों से एनुअल आदि चार्ज भी नहीं लिए जा सकेंगे। लेकिन शासन की तरफ से बिल को लागू नहीं किया जा रहा है।




आपको बता दें की सहारनपुर में कमीशन ख़ोर स्कूलों की एक पूरी जमात है जो बच्चों की फीस में वर्द्धि करने के केवल मौके तलाशती हुई नज़र आती है जिसमें हर साल पुराणी किताबों के नाम पर नई किताबों को लगाना और अपने कमीशन वाले अड्डो से ही कॉपी किताब,स्टेशनरी,युनिफोर्म के लिए अभिभवाको पर दबाव बनाया जाता है. दूसरा एक जो सबसे बड़ा मामला सहारनपुर के स्कूलों के बारें में सामने आया है वह यह है की सहारनपुर के कुछ प्राइवेट स्कुल नए एडमिशन के नाम पर ओपचारिकता पूरी करते है जिससे बच्चों के अभिभावकों के लिए जान बुझकर एक ऐसा माहौल तैयार कराया जाता है की उनके एडमिशन पुरे हो चुके है अब उनके बच्चे को इस स्कुल में एडमिशन नही दिया जा सकता! जिसके बाद परेशान अभिभावक किसी भी प्रकार से अपने बच्चे के साल को बचाने के लिए रिश्वत देने का तरीका खोज लेते है जिसमें स्कूलों के प्रबन्धक पहले तो विरोध करते हुए नज़र आते है बाद में दलालों के माध्यम से रिश्वत लेकर बच्चे का एडमिशन इस शर्त पर ले लेते है की यह सुचना आपको गुप्त रखनी होगी उसके बाद माहौल तैयार यह किया जाता है की वैसे तो हमारे एडमिशन पुरे हो चुके थे लेकिन फलां बच्चा नही आ सका उसका फॉर्म भरा हुआ था उसके स्थान पर हम आपके बच्चे को एडमिशन दे रहे है तो यह वह खेल है जो खुले आम सहारनपुर के कुछ निजी स्कुल खेलने का काम कर रहे है! और अपने काले कारनामो को छिपाने के लिए यह स्कुल प्रशानिक अधिकारीयों व् कुछ दलाल पत्रकारों के माध्यम से अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने का काम करते है. आज के लिए इतना ही अगले लेख में आपको सहारनपुर के स्कूलों के अन्य खेलों और मानकों से जल्द अवगत करायेंगे




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