सहारनपुर में शिक्षण संस्थान बिस्किट नमकीन पर करते है अफसरों का इस्तेमाल

सहारनपुर में शिक्षण संस्थान बिस्किट नमकीन पर करते है अफसरों का इस्तेमाल

सहारनपुर।
निजी स्कूलों में यदि मनमानी फीस वसूल की जाती है तो इस पर निगरानी रखने और निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय अधिकारी का है। इन स्कूलों को उनके द्वारा जो सुविधाएं दी जा रही हैं, उसी आधार पर  फीस का निर्धारण करना चाहिए। लेकिन सहारनपुर में ऐसा नही है। यहां सामाजिक कार्यक्रमों के नाम पर कुछ शिक्षण संस्थान अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए अफसरों का बिस्किट नमकीन पर सौदा करते है। अफसरों का दिल खुश करने को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर लुभाने का प्रयास भी करते है। 



मनमानी फीस वृद्धि पर स्थानीय अफसर को कार्रवाई का है अधिकार इसी लिए लुभाने का होता है प्रयास

यही कारण हैं कि इस तरह की एक्टिविटी को देख कर सरकारी स्कूलों के लगातार गिरते स्तर से लोग प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हैं। इसी मजबूरी का फायदा प्राइवेट स्कूल भी खूब फायदा उठा रहे हैं और हर साल फीस बढ़ा रहे हैं। कितनी फीस बढ़ाई जाएगी, इस पर कोई नियंत्रण नहीं। कहाँ से बुक लेनी है आदि। जिन राजनीतिक पार्टियों पर आपकी आवाज उठाने और स्कूलों की यह मनमानी रोकने की जिम्मेदारी है, वह इसे मुद्दा तक नहीं मानते। आखिर क्यों? कब तक चुप रहेंगे राजनीतिक दल?



प्राइवेट स्कूल हर साल फीस बढ़ाते हैं। इस पर सरकारों की चुप्पी को आप किस तरह देखते हैं? ऐसा तब है जबकि तमाम प्राइवेट स्कूलों को सरकार रियायती दरों पर जमीन देती है।
यह बड़ा मसला है, इससे इनकार नहीं है। प्राइवेट स्कूलों को रेगुलेट करने के लिए कानून हैं, लेकिन लॉ में इतनी स्पेस है कि प्राइवेट स्कूल उसका इस्तेमाल कर लेते हैं। क्या सहारनपुर के सरकारी स्कूलों में वीवीआईपी मोहर लगे बच्चों का दाखिला होना चाहिए ताकि स्कूलों कि स्थिति सुधरे और प्राइवेट स्कूलों के नाम पर मलाई चाट रहे संस्थानों की लोकप्रियता घटे ताकि सहारनपुर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का माहौल बने।

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