Indian-women cricket team

सार
अनुभवी खिलाड़ी मिताली राज के नेतृत्व में भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप खेलने के लिए न्यूजीलैंड में है। टीम इंडिया की नजर पहली बार खिताब जीतने पर है। पिछली बार 2017 में फाइनल में मिली हार के गम को भुलाकर मिताली की टीम इतिहास रचने के लिए तैयार है।

विस्तार
अनुभवी खिलाड़ी मिताली राज के नेतृत्व में भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप खेलने के लिए न्यूजीलैंड में है। टीम इंडिया की नजर पहली बार खिताब जीतने पर है। पिछली बार 2017 में फाइनल में मिली हार के गम को भुलाकर मिताली की टीम इतिहास रचने के लिए तैयार है। भारत में महिला क्रिकेट की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी। तब कुछ महिलाओं ने क्रिकेट को अपनाया था। उस समय इसे आधिकारिक रूप से आयोजित नहीं किया गया था।

इसके बाद 1973 में बेगम हमीदा हबीबुल्लाह की अध्यक्षता में लखनऊ में सोसायटी अधिनियम के तहत भारतीय महिला क्रिकेट संघ (WCAI) को पंजीकृत किया गया था। इसके संस्थापक सचिव महेंद्र कुमार शर्मा थे। यह कई नवोदित महिला क्रिकेटरों के लिए वरदान के रूप में आया था। उसी वर्ष भारतीय महिला क्रिकेट संघ को अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट परिषद (IWCC) की सदस्यता भी प्राप्त हुई थी।

1973 में पहली महिला अंतर-राज्यीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता
1970 और 1973 के बीच क्रिकेट की बहुत सारी गतिविधियां हुई थीं। महिला खिलाड़ी साल के 12 महीनों में से नौ महीने खेल खेलने में व्यस्त थीं। अप्रैल 1973 में पहली महिला अंतर-राज्यीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता पुणे में आयोजित की गई। इसमें बॉम्बे (अब मुंबई), महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की तीन टीमों ने भाग लिया था। उस वर्ष के अंत में इसका दूसरा सीजन वाराणसी में आयोजित किया गया था। तब टीमों की संख्या तीन से बढ़कर आठ हो गई थी।

वाराणसी में आयोजित दूसरे अंतर-राज्यीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता के बाद कार्यकारी समिति का पुनर्गठन किया गया। तब चंद्र त्रिपाठी चैयरपर्सन और प्रमिलाबाई चव्हाण अध्यक्ष बनी थीं। इन दोनों महिलाओं ने संस्थापक सचिव महेंद्र कुमार शर्मा के साथ महिला क्रिकेट के प्रारंभिक विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई। जब तीसरी चैंपियनशिप कलकत्ता में हुई, तब तक टीमों की संख्या बढ़कर 14 हो गई थी। उसके बाद सभी राज्यों ने भाग लिया। बाद में रेलवे और एयर इंडिया ने महिला क्रिकेटरों को नियुक्त किया और उन्होंने अलग-अलग टीमों के रूप में भाग लिया।

जल्द ही अन्य टूर्नामेंट भी आयोजित होने लगे। रानी झांसी ट्रॉफी के नाम से अंतर-क्षेत्रीय सीमित ओवरों का टूर्नामेंट 1974 में कानपुर में आयोजित किया गया था। अंतर-विश्वविद्यालय टूर्नामेंट भी उसी वर्ष राजकोट में आयोजित किया गया था। सब-जूनियर (अंडर-15) और जूनियर (अंडर-19) टूर्नामेंट भी आयोजित किए गए। सभी जोन के विजेताओं ने इंदिरा प्रियदर्शिनी ट्रॉफी खेली। राऊ कप में राष्ट्रीय टूर्नामेंट के चैंपियन का सामना शेष भारत टीम से हुआ था।

1975 में पहली द्विपक्षीय महिला क्रिकेट सीरीज
घरेलू स्तर पर पांच साल की सफलता के बाद भारत में पहली बार द्विपक्षीय महिला क्रिकेट सीरीज 1975 में खेली गई थी। तब ऑस्ट्रेलिया की अंडर -25 टीम ने तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने के लिए भारत के दौरे पर आई थी। पुणे, दिल्ली और कोलकाता में तीन मैच खेले गए थे। दिलचस्प बात यह है कि तीन टेस्ट मैचों के लिए तीन कप्तान थे-उज्ज्वला निकम, सुधा शाह और श्रीरूपा बोस। ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने घर के अलावा उनके मैदानों पर जाकर भी खेली थी। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलियाई और इंग्लैंड के खिलाड़ी स्कर्ट में खेलते थे जबकि भारतीय और वेस्टइंडीज के खिलाड़ी पतलून में खेलते थे।

1976 में पहला अंतरराष्ट्रीय मैच
भारतीय महिला टीम ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ 31 अक्टूबर 1976 को बैंगलोर में खेला। दोनों टीमों के बीच खेला गया टेस्ट मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। यह छह मैचों की टेस्ट सीरीज थी। दोनों टीमों ने एक-एक मैच अपने नाम किया था। बाकी के चार मैच ड्रॉ रहे थे। इस तरह से सीरीज भी बराबरी पर समाप्त हुई थी। उन दिनों महिला टेस्ट मैच तीन दिन में समाप्त होते थे।

दो साल बाद भारत ने 1978 के वर्ल्ड कप के दौरान अपना वनडे डेब्यू किया। भारत द्वारा आयोजित इस टूर्नामेंट में कुल चार टीमों ने भाग लिया था। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड अन्य तीन टीमें थीं। दुर्भाग्य से भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा क्योंकि उसने तीनों मैच गंवाए। डायना एडुल्जी के नेतृत्व वाली टीम अपना पहला वनडे एक जनवरी, 1978 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में इंग्लैंड के खिलाफ खेली थी। 1978 में ही भारतीय महिला क्रिकेट संघ को अंतर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेट परिषद की मान्यता मिली थी।

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