नई दिल्ली: बायोफ्यूल वाले विमान ने भरी उड़ान, 25 मिनट में देहरादून से दिल्ली का सफर।

नई दिल्ली: बायोफ्यूल वाले विमान ने भरी उड़ान, 25 मिनट में देहरादून से दिल्ली का सफर।

रिपोर्ट फराह अंसारी
नई दिल्लीः भारत के एविएशन सेक्टर ने पहली बायोफ्यूल फ्लाइट की सफल उड़ान के साथ ही बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत का नाम अब उन देशों की लिस्ट में शुमार हो गया जो बायोफ्यूल का प्रयोग फ्लाइट के संचालन के लिए करते हैं। सोमवार को स्पाइसजेट के 72 सीटों वाले एक एयरक्रॉफ्ट ने देहरादून से उड़ान भरकर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर दिल्ली पहुंचा। इस विमान में बायोफ्यूल का इस्तेमाल किया गया था। इस ट्रायल फ्लाइट के लिए बयोफ्यूल सीएसआईआर- भारतीय पेट्रोलियम संस्थान की ओर से तैयार किया गया था। 25 मिनट की इस उड़ान के दौरान इस विमान में डीजीसीए के अधिकारियों सहित कुल 20 लोग सवार थे।



स्पाइसजेट के इस विमान में 75 फीसदी एयर टर्बाइन फ्यूल और 25 फीसदी बायोजेट फ्यूल का इस्तेमाल किया गया है. एटीएफ की तुलना में बायोजेट फ्यूल ज्यादा फायदेमंद है। ये कार्बन का उत्सर्जन कम करता है साथ ही विमान की फ्यूल एफिशिएंट बनाता है।सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थानने जैट्रोफा की मदद से ये बायोफ्यूल तैयार किया।

बायो फ्यूल के अन्य फायदे गिनाते हुए स्पाइसजेट के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अजय सिंह ने कहा, बायो फ्यूल सस्ते होने के साथ-साथ कार्बन का उत्सर्जन कम करता है।अगर विमानों में पारंपरिक ईंधन के मुकाबले बायो फ्यूल का इस्तेमाल करें तो विमान से सफर 50 फीसदी तक सस्ता हो सकता है।

स्पाइसजेट के इस विमान को कैनेडियन कंपनी बॉमबाडियर ने डिजाइन किया है। स्पाइसजेट के पास मौजूदा वक्त में 36 बोइंग 737NG और 22 बॉम्बाडियर Q400 प्लेन हैं। रोज़ाना स्पाइसजेट 412 उड़ाने भरती है। ग्लोबल एयरलाइन बॉडी आईएटीए के मुताबिक इस वक्त ग्रीनहाउस गैस के में एविएशन सेक्टर 2 फीसदी तक गैसों का उत्सर्जन करता है। आईएटीए ने साल 2025 तक मिक्स फ्यूल एनर्जी के इस्तेमाल के जरिए 100 करोड़ लोगों के उड़ना भरने का लक्ष्य रखा है।




भारतीय एविएशन सेक्टर ने बढ़ती तेल की कीमतों के कारण परेशानी जाहिर की है और सरकार से एविएशन टर्बाइन फ्यूल को जीएसटी के दायरे में जोड़ने की सिफारिश की है ताकि तेल के बढ़ते दाम पर लगाम लगाई जा सके। ऐसे में देश में पहली बायोफ्यूल फ्लाइट ने भारतीय एविएशन की दुनिया में नई उम्मीद जगाई है।

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