नज़रिया :सहारनपुर का मुस्लिम वोटर देगा भाजपा को सीट-सर्वे।

नज़रिया :सहारनपुर का मुस्लिम वोटर देगा भाजपा को सीट-सर्वे।

माजिद कुरैशी की खास रिपोर्ट-

सहारनपुर। यह खबर आगामी लोकसभा चुनाव मे जो भी भाजपा प्रत्याशी रहेगा उसके लिए काफी फायदेमंद है। क्योंकि यह सुचना एक बार को भाजपा प्रत्याशी को 2019 की सीट के सपने जरूर दिख देगी। बहरहाल। आपको बता दें कि राजनीति की अच्छी जानकारी रखने वाले कुछ राजनितिज्ञों के मुताबिक यह बात मीडिया के सामने ज़ाहिर हुई है। और उनका मानना है कि अगर बात करें सहारनपुर लोकसभा चुनाव की तो यहां भाजपा काफी मजबूत स्थिति में है।

सहारनपुर का मुस्लिम वोटर देगा भाजपा को लोकसभा 2019 की सीट-सर्वे।

सर्वे में सामने आया एक कड़वा सच गठबंधन को मुस्लिम वोटर ही पहुंचाएंगे अधिक नुकसान।



और जब कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा की वो पाकिस्तान बना देगा …? देखें पूरा विवादित वीडियो..

यह मजबूत स्थिति विकास कार्यों या मोदी योगी सरकार को लेकर नही बल्कि इसके पीछे खुद मुस्लिम वोटर्स है। राजनीति के जानकारों ने बताया कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 39.59 % वोट मिला था। यानी कुल पड़े 11 ,94,308 वोटों का 39.59 प्रतिशत। जबकि कांग्रेस के इमरान मसूद को 4,07,909 यानी 34.14 प्रतिशत वोट पड़े थे। जिसमें बसपा के जगदीश राणा 2,35,033 यानी कुल 19.67 प्रतिशत वोट ले पाए थे तो सपा के क़ाज़ी शादान मसूद मात्र 52,765 यानी कुल 4.42 प्रतिशत वही आम आदमी पार्टी के योगेश दहिया 3,065 ही ले पाए थे। बाकी करीब 20 हज़ार वोट अन्य प्रत्याशियों को एंव कुछ वोट खराब भी गया था। तो 2014 के लोकसभा चुनाव में इमरान मसूद पूरे 65,090 वोटों से हारे थे।

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राजनीति के  जानकारों का मानना है कि इस बार भी 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा को उसका अपना वोट तो पड़ेगा ही वही कुछ प्रतिशत मुस्लिम वोट भी भाजपा के खातें में आएगा। जबकि इमरान मसूद का वोट डायवर्ट होकर गठबंधन को जाएगा। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि यदि पिछले चुनाव परिणामो पर एक निगाह डालें तो सपा-बसपा और अन्य दलों का वोट लेकर भी गठबंधन सीट नही निकाल पायेगा। और इमरान मसूद का मुस्लिम वोटर दो जगह फट जायेगा तो कुल मिलाकर यदि सभी लोगों के आंकड़ों को देखा जाये तो सहारनपुर से  परिणाम स्पष्ट है कि भाजपा के लिए यह चुनाव भी फायदे का सौदा साबित होगा।

आखिर कैसे बदल सकता है चुनाव समीकरण।

पहला समीकरण:-

राजनीतिक के ज्ञानी पंडितों ने बताया कि पिछले कुछ सालों में नोटबन्दी जीएसटी और व्यापारी वर्ग की अनदेखी के चलते यदि व्यापारी वर्ग चाहें तो भाजपा के रिर्जव वोट में कटौती कर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकता है। जिससे सीधे सीधे भाजपा को तो नुकसान होगा ही वही वोट प्रतिशत भी धड़ाम हो जाएगा।

नज़रिया :सहारनपुर का मुस्लिम वोटर देगा भाजपा को सीट-सर्वे।
नज़रिया :सहारनपुर का मुस्लिम वोटर देगा भाजपा को सीट-सर्वे।

दूसरा समीकरण

मेयर चुनाव और अपने गलत बयान बाजी के कारण काफी बदनाम हो चुके कांग्रेस नेता इमरान मसूद का ग्राफ काफी तेजी के साथ नीचे गिरा है। सिटी से लेकर देहात की जनता में इमरान मसूद के प्रति एक रोष पनप रहा है। क्योंकि इमरान मसूद के बोटी बोटी वाले बयान को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चुनावी जुमलों में प्राथमिकता पर रखते है जिससे भाजपा चुनाव में वापसी कर जाती है। मुस्लिम वोटर्स इमरान मसूद की गलत बयान बाजी ओर विपक्षी पार्टियों पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपशब्दों एंव जाती सूचक शब्दों का इस्तेमाल करने से एक दूरी बना रहा है। यदि मुस्लिम वोटर इमरान मसूद की जगह गठबंधन पर चला गया तो भाजपा के लिए सीट बचाना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन यह राह बड़ी मुश्किल है।

तीसरा समीकरण।
गठबंधन प्रत्याशी को मजबूती से यदि सपा बसपा के नेतागण जनता के बीच ले गए और जनता उनको समझने में सफल हो गई तो भाजपा के लिए यह समीकरण भी काफी नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन गठबंधन प्रत्याशी को नगर के साथ साथ देहात की जनता का भी रुख करना होगा।

 

बसपा छोड़कर कांग्रेस में जा सकते है क़ाज़ी रसीद मसूद व् उनका परिवार -सूत्र 

लोकसभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आता जा रहा है वैसे ही सहारनपुर की राजनीती भी गर्माने लग गई है क्योंकि जिलें में मुस्लिम नेताओं में टिकट को लेकर बंदरों की लड़ाई चल रही है बात करें यदि सहारनपुर के सबसे बड़ी राजनितिक घराने की तो क़ाज़ी परिवार अपने परिवार के भविष्य को लेकर और अपनी टूटती साख के कारण अब एक होने जा रहे है सूत्रों की अगर माने तो इमरान मसूद और क़ाज़ी रसीद मसूद एक होकर लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयरी में है दूसरा बड़ा कारण अगर देखें तो क़ाज़ी रशीद मसूद एक बड़े राजनितज्ञ है और वह दूर की देखते है कही ना कहि उनको लगने लगा है की इस बार देश की राजधानी से भाजपा सरकार का सुपडा साफ़ होने जा रहा है तो यही मौका है कि इसका फायदा उठाकर लोकसभा के वक्त कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर दिल्ली की राजनीती में फिर से सक्रिय हो जाये और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से ही अपने वंशजों के लिए टिकट की दावेंदारी करें, वही, दूसरा कारण यह भी माना जा रहा है की बसपा में केवल पैसो वालों को टिकट दिया जाता है जबकि दूसरों कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जाती है यह कारण भी क़ाज़ी परिवार को बसपा छोडकर कांग्रेस में जाने को विवश कर रहा है 

 

सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष मज़ाहिर हसन मुखिया भी कांग्रेस ज्वाइन करने की फ़िराक में-सूत्र 

सूत्रों की अगर माने तो सपा के पूर्व मंत्री आशु मलिक के ख़ास माने जाने वाले सहारनपुर के पूर्व सपा  जिला अध्यक्ष मज़ाहिर हसन मुखिया भी कांग्रेस में जाने का मन बना रहे है अब देखन यह है कि यह सब अफवाहें है या हकीकत यह तो आने वाला समय बतायेगा . लेकिन फिलहाल सहारनपुर की राजनीती में एक हलचल मची हुई है 

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