मेघालय खादान हादसा :परिजनों का छलका दर्द,"कम से कम शव के नाम पर एक उंगली या हड्डी ही दे दो"

मेघालय खादान हादसा :परिजनों का छलका दर्द,”कम से कम शव के नाम पर एक उंगली या हड्डी ही दे दो”

शिलॉन्ग/नई दिल्ली।
लगभग 34 दिनों से मेघालय की 370 फीट गहरी एक कोयले की खदान में फंसे 15 मजदूरों में से 4 के परिवार ने बचावकर्ताओं से क्षत-विक्षत शव को बाहर निकालने की अपील की थी ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके। इन परिवारों का दर्द हिला देने वाला है। परिजन कहते हैं कि कम से कम शव के नाम पर एक उंगली या हड्डी ही दे दो ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके। आपको बता दें कि खदान में फंसे मजदूरों के परिजनों का सब्र का बांध टूट चुका है। वह बचावकर्ताओं से अपील करते हैं कि शव को बाहर निकाला जाए ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके।


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मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में हुआ था खदान हादसा
अब तक शव नहीं मिलने से पीड़ित परिजनों का छलका दर्द
16 जनवरी को नेवी के रेस्क्यू के दौरान दिखा था एक शव
13 दिसंबर को खदान में नदी का पानी आने से फंसे थे मजदूर

नौसेना के गोताखोरों को दिखाई दिया था एक शव
नौसेना के गोताखोरों ने 16 जनवरी को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पहला शव दिखाई दिया था। खदान के 160 फीट अंदर एक मजदूर का क्षत-विक्षत शव मिला था। इसके लिए उन्होंने मानवरहित, रिमोटली ऑपरेटेड वीइकल (आरओवी) का इस्तेमाल किया था।

पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के डेप्युटी कमिश्नर एफ एम डोप्थ ने कहा कि पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके शव को बाहर निकालना बेहद मुश्किल भरा काम होगा। 15 मजदूरों में से एक 20 साल के मोनिरुल इस्लाम भी हैं जिनके भाई मानिक अली कहते हैं, ‘हम शव चाहते हैं।’

वह बेहद बेबसी से कहते हैं, ‘अगर उंगली या कोई हड्डी भी मिले तो भी अंतिम संस्कार के लिए हमें यह काफी होगा। कम से कम हम सम्मानजनक ढंग से दफना सकेंगे।’ इसके बाद वह फूट-फूटकर रोने लगते हैं। एक खनिक के भाई अमिनुल उद्दीन कहते हैं, उन्होंने हमें एक विडियो दिखाया। शव फूल चुके हैं लेकिन चेहरा नहीं दिख रहा था इसलिए हम पहचान नहीं कर सके।


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उधर, भारतीय नौसेना ने मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में कोयले के एक खदान के भीतर चार दिन पहले दिखाई दिए एक खनिक के क्षत-विक्षत शव को बाहर निकालने के सभी प्रयास रविवार को बंद कर दिए।

अभियान के प्रवक्ता आर सूसनगी ने बताया, ‘नौसेना ने शव को बाहर निकालने का काम आज बंद कर दिया क्योंकि आरओवी से शव निकालने की जितनी बार कोशिश की गई शव उतनी बार और क्षत-विक्षत हुआ। शव निकालने का काम कम शाम से चल रहा था।’

 

सुरंग में भर गया था नदी का पानी
गौरतलब है कि 13 दिसंबर को 370 फीट गहरे कोयला खदान में नदी का पानी भर जाने से सुरंग का रास्‍ता बंद हो गया था। तब से इसमें फंसे 15 खनिकों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी। जनवरी में ही पूर्वी जयंतिया जिले में एक और अवैध कोयला खदान में दो खनिकों के शव मिले थे। इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल ने असुरक्षित खनन पर 2014 से प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद अवैध खनन जारी है।

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