इंसान बन गया है मशीन

हम दिनभर तमाम ऐसे कामों में उलझे रहते हैं कि शरीर पर ध्यान ही नहीं दे पाते. सुबह जल्दी-जल्दी उठना फटाफट नहा-धोकर तैयार होते हुए नाश्ता करना और फिर नौकरी या बिजनेस के लिए दौड़ पड़ना. ये तो सुबह-सवेरे की दिनचर्या है इसमें बच्चे से लेकर आदमी और यहां तक कि घरेलू महिलाएं भी शामिल हैं महिलाएं बच्चों और घर के पुरुषों को तैयार करने में खुद भी एक मशीन भर बनकर रह जाती हैं।

सुबह के बाद घर, ऑफिस या दुकान पर काम में उलझे रहते हैं आजकल वर्किंग कल्चर बदल गया है. दफ्तरों में 8-9 घंटे लगातार काम करना पड़ा है ऑफिस के टारगेट पूरा करने के लिए मशीनों से उलझे रहते हैं।

कुल मिलाकर पूरे 24 घंटे में हम अपने शरीर के कपड़ों और मैकअप तो ध्यान देते हैं मगर अंदर से हमारा शरीर कैसा है, उसे क्या चाहिए और हम उसे क्या दे रहे हैं, बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाते इसलिए जरूरी है कि जिस शरीर से आप इतना तनाव लेकर इतनी मेहनत कर रहे हैं थोड़ा बहुत ध्यान उस पर भी देना चाहिए ताकि आप अपने लक्ष्यों को हासिल कर सको और वह भी अच्छी सेहत के साथ. सुबह ऑफिस या काम पर जल्दी जाने की वजह से आप शरीर पर ध्यान नहीं दे पाते तो कोई बात नहीं घर आने के बाद रात तो अपनी है इसलिए शाम को ही सही, कुछ समय और ध्यान अपने आप और अपने शरीर के लिए भी निकालें।

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