सांसद हाजी फजलुर्रहमान की बढ़ी लोकप्रियता से लकड़बग्गा नेताओं में मची खलबली

सांसद हाजी फजलुर्रहमान की बढ़ी लोकप्रियता से लकड़बग्गा नेताओं में मची खलबली

वरिष्ठ पत्रकार माजिद कुरैशी की विशेष रिपोर्ट
सहारनपुर: साल 2017 में जनपद में मेयर पद के लिए 12 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे जिसमें बसपा सिम्बल पर पहली बार चुनाव लड़ें हाजी फजलुर्रहमान इस चुनाव में विजेता साबित होते-२ रह गये थे जिसके बाद उत्तर प्रदेश की राजनीती में हलचल पैदा हो गई क्योंकि इस मेयर चुनाव में कांग्रेस नेता इमरान मसूद नें बड़ी ही दिलेरी के साथ अपने प्रत्याशी को चुनाव लडवाया था लेकिन दुर्भाग्य से उनका प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान और भाजपा के प्रत्याशी संजीव वालिया के आगे घुटने टेक चूका था. उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव के नतीजों पर तस्वीर साफ हो चुकी थी . पश्चिमी यूपी के सहारनपुर नगर निगम की मेयर सीट पर बीजेपी उम्मीदवार मेयर पद पर जीत दर्ज कर चुके थें. लेकिन बसपा प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान इस चुनाव में हार कर भी जीत गये और जनपद की जनता नें उनको आश्वासन दिया की वह मेयर सीट के लिए नही बल्कि सांसद सीट जीत कर लोकसभा जाने के काबिल है.



परिणामस्वरूप, हुआ भी कुछ ऐसा ही बसपा से एक बार फिर बसपा सुप्रीमों मायवती नें मेयर टिकट के बाद हाजी फजलुर्रहमान पर भरोसा जताते हुए लोकसभा का टिकट भी दे दिया और लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश की सहारनपुर सीट पर एक दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला. साल 2014 के मोदी लहर में बीजेपी के राघव लखनपाल ने बड़ी जीत दर्ज की थी. जिससे 2019 में बीजेपी के लिए इस सीट को बचाए रखना एक बड़ी चुनौती थी लेकिन बसपा प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान नें कांग्रेस के प्रत्याशी इमरान मसूद और भाजपा के प्रत्याशी राघव लखनपाल को कड़ी शिकस्त देते हुए जनता जनार्दन का प्रबल वोट लगभग (514,139 ) वोट लेकर भाजपा के प्रत्याशी राघव लखनपाल (491,722) को 22 417 वोटों से करारी मात दी थी और कांग्रेस के ब्रांड नेता इमरान मसूद का सफर 207,068 वोटो पर लाकर रोक दिया था और उनसे 307071 अधिक वोट लेकर यह साबित कर दिया था कि जनता अब बदजुबानी राजनीती और दिखावे की राजनीती से उबकर कुछ अलग बदलाव चाहती है.



सांसद हाजी फजलुर्रहमान की बढ़ी लोकप्रियता से लकड़बग्गा नेताओं में आखिर क्यों मची खलबली?
दरअसल पिछले 70 सालों से देश की राजनीती बिरादरी वाद पर आधारित रही है बड़ी बिरादरी हमेशा से ही शिक्षा और पैसे में सक्षम हुआ करती थी जिसका जितना बड़ा जिमीदारा उसके उतने बड़े रसूक हुआ करते थे लेकिन सन 90 के बाद देश की राजनीती में एक परिवर्तन आया और निचली जाति बिरादरी के लोगों नें शिक्षा को अपनाया और अपने अधिकारों की लड़ाई को लड़ने का काम किया.
साल 2017 में जब सांसद हाजी फजलुर्रहमान नें चुनाव लड़ने का संकल्प लिया तो उनके इर्द गिर्द घुमने वालें बिरादरी वाद के जहरीले साँपों नें अपनी जहरीली मानसिकता का परिचय देते हुए कहा की यदि आप अपनें नाम के सामने कुरैशी लिखेंगे तो शायद आप मेयर ना बन पायें भोले और सीधें सरल स्वभाव के हाजी फजलुर्रहमान नें उनकी बात मान ली और अलीगढ़ में पढ़ा लिखा होनें के चलतें अपनें नाम के सामने हाजी फजलुर्रहमान अलीग लगा लिया लेकिन राजनीती के पेंतरे शायद वह नही जानते थें उनकें इस कदम से उनके प्रतिद्वंद्वीयों नें इस बात पर अपनी आपत्ति ज़ाहिर कर वोटो को लुभानें का प्रयास किया की

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हाजी फजलुर्रहमान जिस कुरैशी बिरादरी से है उनके सांसद या मेयर बनने से यह बिरादरी जिलें में उत्पात मचा देगी जबकि इस बात के पीछें लकड़बग्गा नेताओं की साजिश यह थी की एक छोटी बिरादरी का बेटा जिलें में मेयर या सांसद ना बन जाएँ जबकि लकड़बग्गा नेता यह भूल गये की इस समाज नें देश को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल एम0ए0 एल0एल0बी0, डॉ अजीज कुरैशी भी दिए थें जिन्होंने अपनें नाम के पीछें अपनें समाज का नाम गर्व से लिखा. लकड़बग्गा जानवर नस्ल के यह नेता जब हाजी फजलुर्रहमान को चुनाव में पराजित नही करवा पायें तो उन्होंने सांसद की बिरादरी को टार्गेट करना शुरू क्र सस्ती लोकप्रियता हासिल करनी चाही



लॉक डाउन में जन जन तक पहुंचा सांसद हाजी फजलुर्रहमान का परिवार
पूरी दुनिया कोरोना महामारी से लड़ रही थी और भारत में भी इसका प्रकोप देखनें को मिला. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नें बिना किसी योजना के एक दिन का जनता कर्फ्यू लोलीपोप दिखाकर जनता से ताली और थाली तो बजवा ली लेकिन फिर उनको पूरे ४ महीनें के लियें घरों में कैद करवा दिया बिना तयारी के गरीब और बेसहारा लोगों को जिन्दगी जीना दुस्वार हो गया ऐसे में बड़े बड़े नेताओं नें खुद को तालों में कैद क्र लिए लेकिन सहारनपुर के सांसद हाजी फजलुर्रहमान और उनके परिवार नें घर में राशन बनवाकर रोजाना जरुरतमंदों तक उनकी चोखट तक खाना और दवाइयां भिजवानें और पहुंचवाने का काम किया इतना ही नही जनता की सेवा करते करते अपनें पुरें परिवार को कोरोना महामारी में झोंक दिया इसी मेहनत नें हाजी फजलुर्रहमान के चाहनें वालों में इजाफा करवा दिया इसी लोकप्रियता को देखते हुए लकड़बग्गा नेताओं में खलबली मचनी शुरू हो गयी और जब कुछ नही मिला सका तो सांसद हाजी फजलुर्रहमान पर लांछन लगानें की प्रकिर्या शुरू करदी क्योंकि हाजी फजलुर्रहमान अब पहले से ज्यादा आस्तीन में छिपें साँपों को पहचानने लगें हैं.

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