काली-काली जामुन गुणों से भरपूर

जामुन भारत में काफी लोकप्रिय फल माना जाता है। जामुन को ब्‍लैकबेरी के नाम से भी बुलाया जाता है। जामुन एक ऐसा फल है जिसे मधुमेह रोगी बिना किसी परेशानी के खा सकते हैं। जामुन की गुठली ब्‍लड शुगर की अधिकता को नियंत्रित करने की अद्भुत शक्ति रखती है।

औसतन 100 ग्राम जामुन में 62 किलो कैलौरी ऊर्जा, 1.2 मिली ग्राम लोहा, 15 मिली ग्राम कैल्शियम, 15 मिली ग्राम फास्फोरस 18 मिलीग्राम विटामिन सी, 48 माइक्रोग्राम कैरोटीन,55 मिलीग्राम पोटेशियम,35 मिली ग्राम मैग्नीशियम और 25 मिलीग्राम सोडियम पाया जाता है। जामुन में विटामिन बी और आयरन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। एनीमिया (खून की कमी) के मर्ज को दूर करने में और रक्त में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए जामुन का सेवन लाभप्रद है।

यही नहीं जामुन सेवन से त्वचा का रंग निखरता है। जिन लोगों को ‘सफेद दाग’ का मर्ज है, उन्हे जामुन खाना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह को नियंत्रित करने में भी जामुन सहायक है। जामुन बिल्‍कुल भी मंहगा फल नहीं है और इसका पेड़ आसानी से सड़कों किनारे मिल जाता है। आपको भी अपने घर में जामुन का फल लगाना चाहिये और इसके गुणों का फायदा उठाना चाहिये।

जामुन के फायदे –
1. मधुमेह के उपचार के लिए जामुन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। मधुमेह के रोगी जामुन की गुठलियों को सुखाकर, पीसकर उनका सेवन करें। इससे शुगर का स्तर ठीक रहता है।

2. जामुन शरीर की पाचनशक्ति को मजबूत करता है। जामुन खाने से पेट सं‍बंधित विकार कम होते हैं।

3. जामुन में एंटी कैंसर के गुण भी पाये जाते हैं। कीमोथेरेपी और रेडिएशन में भी जामुन फायदेमंद होता है।

4. जामुन का पका हुआ फल खाने से पथरी में फायदा होता है। जामुन की गुठली के चूर्ण को दही के साथ मिलाकर खाने से पथरी में फायदा होता है। लीवर के लिए जामुन का प्रयोग बहुत फायदेमंद होता है। कब्ज और पेट के रोगों के लिए जामुन बहुत फायदेमंद होता है।

5. मुंह में छाले होने पर जामुन के रस का प्रयोग करने से छाले समाप्त हो जाते हैं।

6. दस्त या खूनी दस्त होने पर जामुन बहुत फायदेमंद है। दस्त होने पर जामुन के रस को सेंधानमक के साथ मिलाकर खाने से दस्त होना बंद हो जाता है।

7. गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।

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