बिहार: बालिका गृह में दरिंदगी की इंतहा, बग़ैर कपड़ों के सोने को मजबूर किया जाता।

बिहार: बालिका गृह में दरिंदगी की इंतहा, बग़ैर कपड़ों के सोने को मजबूर किया जाता।

फराह अंसारी
बिहार: बेसहारा लड़कियों को सहारा देने के नाम पर बिहार के मुजफ्फरपुर में सात से 18 साल की उम्र की लडकियों के साथ महीनों बलात्कार होता रहा और सरकार चुप रही। सरकार चुप रही क्योंकि बेसहारा लड़कियों का वो शेल्टर होम सराकरी रेप गृह निकला।

बालिका संरक्षण के नाम पर बिहार के मुज्फ्फरपुर में बिहार की सरकार ने बेटियों का एक आलीशान यातना शिविर आबाद किया था। रहनुमा के नाम पर जिसे यहां तैनात किया गया था वो भेड़िया बन गया था। शाम ढलते ही मेहमानों की आमद शुरु होती। झक सफेद खादी में चमकते हुए चेहरे। और इसी के साथ शुरु होता जुल्म का ऐसा सिलसिला जिसने आसमान की सफेदी पर अमावस का अंधेरा छाप दिया है। छाप डाली हैं बच्चों की किताबों पर जुल्म की वो कहानियां कि जिनके आगे पाप की सारी कुंडियां उखड़ गई हैं। छाप डाली हैं परियों की दास्तान पर दर्द की सुलगती हुई सलाखें।



सात साल की, दस साल की, बारह साल की बच्चियां जब चीखतीं तो इन दीवारों का गारा चटकने लगता। मजिस्ट्रेट के सामने सात बरस की बच्ची ने बयान दिया है कि हंटर वाला आदमी जब हमारे सामने आता था को हमारी रूहें कांप उठती थीं। पिछले रात की घावों पर हंटर के निशान दिखाती हुई बच्चियों ने अपनी बेबस आंखों से जज की आंखों में जिंदगी की परछाईं देखने की कोशिश की थी। और फिर गिर पड़ी थी इस महान लोकतंत्र के खोदे हुए पाताल में। एक नहीं दो नहीं चार नहीं पूरे 34 बच्चियों के बचपन पर सत्ता के यारों ने बेहयाई की कीलें ठोक दी थीं।

सीबीआई की जांच तामील हो चुकी है। अफसरों का दौरा शुरु हो चुका है। दर्ज हो चुके हैं बयान। और साथ में सियासत भी। लेकिन इन दीवारों की गवाहियां बाकी हैं। जिसकी हर ईंट के नीचे दफन हैं दर्द की रुबाईयां, जिसकी फौलादों पर चस्पा हैं बेटियों की चीखें। जिसके हर तख्त के नीचे दबी हुई हैं, मासूम तमन्नाओं की लाशें। सभ्यता के मरे हुए ताल में तैरती हुई इंसानियत की लाशें सियासत की बेशर्मी की वो शिनाख्त हैं, जिनके आगे न तफ्तीशों का कोई मोल बचा है, न रिपोर्टों का और न ही सजाओं का।

ये मुजफ्फरपुर के बालिका गृह की झकझोर देने वाली कहानी है। जहां शेल्टर होम में रहने वाली 34 लड़कियों के साथ कई महिनों से बलात्कार किया जाता रहा। इस मामले में नेता, अफसर और ताक़तवर लोगों पर शक है। बच्चियों को बग़ैर कपड़ों के सोने को मजबूर किया जाता था। लड़कियों की हंटर से पिटाई की जाती थी। उन लड़कियों को मिर्गी की सुई दी जाती थी। जिससे लडकियां फौरन बेहोश हो जाती थी। जब लड़कियां गर्भवती हो जाती थी, तो बालिका गृह में ही उनका गर्भपात कराया जाता था। गर्भपात के लिए बाक़ायदा



वहां ‘ऑपरेशन थिएटर’ बना रखा था।

बिहार की राजधानी पटना के बिल्कुल करीब छोटा सा शहर मुजफ्फरपुर। इसी मुजफ्फरपुर के साहू रोड पर मौजूद लावारिस बच्चियों का ये शेल्टर होम जिसे बालिका गृह भी कहते हैं।इस बालिका गृह में अमूमन 6 से 18 साल तक की ल़ड़कियां रहती हैं। जिनके साथ हद दर्जे की बदसलूकी की जाती थी। उनका जिस्म नोचा जाता था। उनकी आबरू लूट ली जाती थी।

Facebook Comments

मामले (भारत)

67152

मरीज ठीक हुए

20917

मौतें

2206

मामले (दुनिया)

3,917,999