लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार भगोड़े कारोबारियों को भेजेगी जेल ??

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार भगोड़े कारोबारियों को भेजेगी जेल ??

नई दिल्ली:
भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अगले 2-3 महीनों में आम चुनाव होंगे। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस आम चुनाव में देश छोड़कर फरार हो चुके कुछ उद्योगपतियों की काफी अहम भूमिका रह सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे कार्यकाल की राह देख रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भगोड़े शराब कारोबारी, हथियार सौदों के एक दलाल, एक अरबपति जूलर और एक कॉर्पोरेट लॉबीस्ट को सजा दिलाने की कोशिशें तेज कर दी है। ये भगोड़े कारोबारी देश में मुकदमे का सामना करने से बचने के लिए फरार हो चुके हैं। मई में आम चुनाव होने हैं लेकिन उससे पहले ही पीएम मोदी को इस दिशा में कुछ कामयाबी मिल चुकी है।



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दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अगले 2-3 महीनों में आम चुनाव होंगे। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस आम चुनाव में देश छोड़कर फरार हो चुके कुछ उद्योगपतियों की काफी अहम भूमिका रह सकती है।

क्रिस्चन मिशेल, दीपक तलवार के प्रत्यर्पण के बाद माल्या को लाने की दिशा में अहम कामयाबी
भगोड़े कारोबारियों के खिलाफ ऐक्शन का बीजेपी को आम चुनाव में मिल सकता है लाभ
माल्या को भारत प्रत्यर्पण करने के आदेश पर यूके के होम सेक्रटरी ने रविवार को किए दस्तखत
प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ 14 दिनों के भीतर अपील कर सकता है शराब कारोबारी विजय माल्या

टेन के होम सेक्रटरी साजिद जावेद ने लंदन में रह रहे शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के आदेश पर रविवार को दस्तखत कर दिए। इससे पहले भारत सरकार को हथियार सौदों के कथित बिचौलिये और अगुस्टावेस्टलैंड घोटाले के आरोपी क्रिस्चन मिशेल के साथ-साथ लॉबीस्ट दीपक तलवार को दुबई से भारत लाने में कामयाबी मिल चुकी है।


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2014 में नरेंद्र मोदी की अगुआई में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद बीजेपी को हालिया विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में कानून तोड़ने के आरोपी अमीरों पर कानून का फंदा कसने से इस महत्पूर्ण समय में सरकार की छवि मजबूत हो सकती है।

नई दिल्ली स्थित थिंक-टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सीनियर फेलो निरंजन साहू कहते हैं, ‘इससे मोदी की ऐंटी-करप्शन फाइटर की छवि और मजबूत होगी और इससे यह संदेश जाएगा कि वह सिस्टम की गंदगी को साफ करने की कोशिश कर रहे हैं।’ वह कहते हैं, ‘चुनाव बहुत हद तक परसेप्शन का खेल है और यह बहुत सही वक्त पर हो रहा है।’

हीरा कारोबारी
माल्या और हीरा कारोबारी नीरव मोदी जैसे अरबपतियों के प्रत्यर्पण से विपक्ष के उस अभियान की हवा निकल सकती है, जिसमें सरकार को बड़े उद्योगपतियों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया जा रहा है। क्रिस्चन मिशेल और दीपक तलावर को भारत लाने से मोदी की एक ऐसे नेता के रूप में छवि मजबूत होगी कि जो भ्रष्टाचार के प्रति नो टॉलरेंस रखता है।

चुनावी खेल
भ्रष्टाचार के हाई-प्रोफाइल आरोपियों पर कानून का फंदा मजबूत करने से सरकार को वोटरों का रोजगार के मुद्दे से ध्यान हटाने में भी मदद मिलेगी। पर्याप्त रोजगार सृजन में सरकार नाकाम रही है। इसके अलावा नोटबंदी से अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ा है और जीएसटी को भी सही तरीके से लागू करने में सरकार असफल रही है।

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम में एशिया रिसर्च इंस्टिट्यूट की डायरेक्टर कैथरीन एडेनी कहती हैं, ‘मोदी सरकार इसे (माल्या के प्रत्यर्पण आदेश) अपने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की सफलता बता रही है। हालांकि, इसका चुनाव पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है। ज्यादातर भारतीयों के लिए नौकरियों की कमी, ग्रामीण गरीबी और अर्थव्यवस्था की स्थिति जैसे मुद्दे मायने रखते हैं।’

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