माया-अखिलेश में गठ्बन्धन,कांग्रेस बाहर..?

माया-अखिलेश में गठ्बन्धन,कांग्रेस बाहर..?

लोकसभा 2019 के चुनावों के लिए अब सबकी नजरें उत्तर प्रदेश के महागठबंधन पर टिकी हुई हैं। अबतक महागठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इसके अलावा यह भी तय नहीं हुआ है कि इस महागठबंधन में कांग्रेस की क्या भूमिका होगी। यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं और दिल्ली में सत्ता के लिए यह सूबा अहम है।

लखनऊ।
हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद अब 2019 के महा-रण के लिए स्टेज सेट हो चुका है। सूत्रों की अगर मानें तो कांग्रेस समेत लगभग पूरा विपक्षी केंद्र की बीजेपी सरकार के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग गठबंधन बनाने के गणित पर काम कर रहा है। इनमें सबसे अहम है यूपी का महागठबंधन लेकिन इसे जुड़ा जो सबसे बड़ा सवाल अभी तक अनुत्तरित है, वह यह है कि 80 लोकसभा सीटों वाले यूपी में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन की शक्ल क्या होगी?

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यूपी में महागठबंधन में कांग्रेस शामिल होगी या नहीं, इसको लेकर असमंजस लेकिन कुछ सीटों पर SP-BSP को कांग्रेस के नहीं होने का फायदा मिल सकता है जबकि दिल्ली में सत्ता के लिए 80 सीटों वाले यूपी की निर्णायक भूमिका रहने वाली है।



वहीं,एसपी-बीएसपी के बीच दिख रहा तालमेल गठबंधन की शक्ल अख्तियार कर पाएगा या नहीं? इस गठबंधन में कांग्रेस को जगह मिल पाएगी या नहीं? कांग्रेस को परंपरागत वोटों का एक बड़ा हिस्सा अपर कास्ट से आता है। रोचक पहलू यह है कि कुछ जगहों पर कांग्रेस से अलग राह का फायदा अखिलेश यादव को मिला है, जबकि कांग्रेस का साथ रास नहीं आया है।

हाल के महीनों में यूपी में एसपी-बीएसपी कांग्रेस के साथ जिस तरह की दूरी बना कर चल रहे हैं, उसके मद्देनजर दोनों के गठबंधन में कांग्रेस के लिए बहुत कम जगह बनती दिख रही है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के नतीजों के बाद सरकार बनाने के लिए एसपी-बीएसपी ने कांग्रेस के प्रति जिस तरह का उदार रवैया दिखाया, उससे यूपी में कांग्रेस को साथ लेने की संभावनाओं को बल मिला था, लेकिन दोनों दलों की तरफ से यह साफ कर दिया गया कि राजस्थान और मध्यप्रदेश के फैसले को यूपी से जोड़कर नहीं देखा जाए। इस वजह से महागठबंधन की शक्ल को लेकर बात जहां ठहरी हुई थी, वहीं अभी भी ठहरी दिखाई दे रही है। हां, यह जरूर है कि एसपी-बीएसपी के बीच गठबंधन होने की संभावनाओं को रोज-ब-रोज बल मिल रहा है।

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आखिर क्या है इस एसपी-बीएसपी की दुरी की वजह..?
एसपी और बीएसपी, दोनों के अंदर यूपी में कांग्रेस को लेकर बहुत ज्यादा उत्साह न दिखाने की वजह बहुत स्पष्ट नजर आ रही है। इन दोनों पार्टियों को इस बात का डर सता रहा है कि कांग्रेस को साथ लेने से बीजेपी को फायदा हो सकता है। कांग्रेस को शहरी और ग्रामीण सीटों पर जो भी वोट मिलता है, उसका एक बड़ा हिस्सा अपर कास्ट से आता है। कांग्रेस के एसपी-बीएसपी के साथ होने पर यह वोट बैंक न तो कांग्रेस के पक्ष में आता है, न ही एसपी-बीएसपी उम्मीदवारों को ट्रांसफर होता है बल्कि यह बीजेपी के साथ चला जाता है। नजदीकी मुकाबलों में यह बीजेपी की जीत का बड़ा कारण बन जाता है। इस बात का अनुभव कांग्रेस के साथ 1996 में गठबंधन कर चुनाव लड़ने से बीएसपी को भी हो चुका है और 2017 में एसपी को भी। अब देखना है चुनाव के गठ्बन्धन का यह ऊंट आखिर किस और बैठता है जबकि सभी दल भाजपा को सत्ता से निकालने का मन बना चुके है जोकि इतना आसन काम नही है.

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