प्राइवेट हॉस्पिटल में फर्जी बिल स्टिंग के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट।

प्राइवेट हॉस्पिटल में फर्जी बिल स्टिंग के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट।

रिपोर्ट फराह अंसारी
नई दिल्ली: अस्पतालों में फर्जी बिल का स्टिंग ऑपरेशन दिखाए जाने के बाद केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय ने राज्य सरकारों से रिपोर्ट मांगी है। स्टिंग मे दिखाया गया कि कैसे दिल्ली और आसपास के निजी अस्पतालों मे फर्जी बिल का कालाधंधा चल रहा है। इन अस्पतालों में इलाज के लिए दलालों का नेटवर्क काम करता है। इलाज में मोटी रकम वसूल कर अस्पताल एजेंट को कमीशन देते हैं।



देश की राजधानी दिल्ली में मौजूद भारत के बड़े अस्पताल अपोलो हॉस्पिटल में अंडरकवर रिपोर्टर एक एजेंट बनकर पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल में दावा किया कि हमारे पास इराक का एक मरीज है, जिसका लिवर ट्रांसप्लांट कराना है। रिपोर्टर ने अस्पताल के डिप्टी जनरल मैनेजर अजय भारद्वाज से मरीज के लिवर ट्रांसप्लांट कराने के बदले कमीशन की बात कही।

रिपोर्टर से बातचीत के दौरान डिप्टी जनरल मैनेजर अजय भारद्वाज ने ट्रांसप्लांट का 24 लाख का बिल बनाने की बात कही। उन्होंने कबूल किया कि मरीज को लेकर अस्पताल आए एजेंट को 24 लाख के बिल पर 5 लाख रुपए मिलेगा। उन्होंने बताया कि मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट कराने लाने पर अस्पताल तो 24 लाख रुपए का बिल मरीज से वसूलेगा, लेकिन अस्पताल खुद 19 लाख रुपए रखेगा और 5 लाख मरीज को लाने वाले एजेंट को देगा।

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के वैशाली में मैक्स अस्पताल कंसल्टेंट डॉक्टर गौरव यादव ने भी विदेश से मरीज का इलाज कराने लाने वाले एजेंट को कमीशन देने की बात कही। स्टिंग पर उन्होंने कबूल किया कि मरीज को लाने वाले एजेंट को 20% से 27% कमीशन दिया जाता है। दलाल को देने वाला हिस्से का बिल भी मरीज के नाम पर काटा जाता है। इलाज के बिल में बढ़ा-चढ़ाकर रकम ली जाती है, ताकि उस पैसे से मरीज को लाने वाले एजेंट का कमीशन अस्पताल दे सके।


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