उत्तर प्रदेश में पॉलीथीन बनाने और बेचने पर 1 लाख का जुर्माना

रिपोर्ट फराह अंसारी
लखनऊ: पॉलीथीन पर सख्ती से रोक लगाने के लिए मौके पर ही जुर्माना लगाया जाएगा। इसके लिए यूपी सरकार अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। नगर विकास विभाग इसके मसौदे का प्रारूप तैयार कर रहा है। जल्द ही इसे कैबिनेट से मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

यूपी सरकार पॉलीथीन पर सख्ती से रोक के लिए ऐसी व्यवस्था करने जा रही है, जिससे बनाने और बेचने पर जुर्माना भरना होगा। इतना ही नहीं,अभी तक कार्रवाई का अधिकार केवल निकायों के पास है लेकिन अब यह अधिकार जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भी देने की तैयारी है।

अभी तक के कानून के अनुसार पहली बार पकडे जाने पर एक माह कारावास और 5000 रुपये तक जुर्माना लगाया जाता था। दूसरी बार ऐसा करते पाये जाने पर 6 माह की सजा और 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था। यूपी सरकार अब इसे बढ़ाकर जुर्माने की राशि एक लाख रुपये और सजा एक साल तक करने जा रही है। व्यक्तिगत रखने पर एक हजार से 10 हजार, दुकान या फैक्ट्री वालों पर 10 हजार से एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया जा रहा है।

सीएम योगी के निर्देश पर नगर विकास विभाग 50 माइक्रॉन से पतली पॉलीथीन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इसके मुताबिक पतली पॉलीथीन में न तो कोई सामान पैक कर बेचा जा सकेगा और न ही इसका इस्तेमाल थैले के रूप में किया जा सकता है। इस पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने के लिए छापेमारी अभियान चलाया जाएगा। नगर विकास विभाग अध्यादेश के मसौदे में छापेमारी और मौके पर जुर्माना लगाने के लिए विशेष प्रावधान कर रहा है। छापेमारी के लिए नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई जाएगी। वर्ष 2000 के अधिनियम में 20 माइक्रान से पतली पॉलीथीन पर प्रतिबंध की व्यवस्था है। इसे 20 से बढ़ाकर 50 किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर 15 जुलाई से अनिवार्य रूप से पॉलीथीन पर प्रतिबंध लगाया जाना है। नगर विकास विभाग चाहता था कि समय-समय पर जारी शासनादेशों को संशोधित करते हुए एक नया शासनादेश जारी कर प्रतिबंध में सख्ती की जाए।

यूपी में पतली पॉलीथीन का कारोबार 100 करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है। कुटीर उद्योग के रूप में पनपे इस धंधे में हजारों की संख्या में मजदूर लगे हैं। पतली पॉलीथीन बनाने वाले सरकार को टैक्स देने से बचते हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।

50 माइक्रॉन से पतली पॉलीथीन का इस्तेमाल पैकिंग में भी किया जा रहा है। खासकर ब्रेड, पान मसाला, पानी के पाउच, सब्जियों की पैकिंग तक पतली पॉलीथीन में की जा रही है। इससे आम लोगों के स्वास्थ्य को खतरा बना रहता है।

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